निरुक्त
भारतवर्ष को प्राचीन ऋषियों ने
"हिन्दुस्थान" नाम
दिया था जिसका अपभ्रंश
"हिन्दुस्तान" है। "बृहस्पति आगम" के
अनुसार:
“
हिमालयात् समारभ्य यावत्
इन्दु सरोवरम्। तं देवनिर्मितं देशं
हिन्दुस्थानं प्रचक्षते॥
”
अर्थात, हिमालय से प्रारम्भ होकर
इन्दु सरोवर (हिन्द महासागर) तक यह
देव निर्मित देश हिन्दुस्थान
कहलाता है।
"हिन्दू" शब्द "सिन्धु" से
बना माना जाता है। संस्कृत में
सिन्धु शब्द के दो मुख्य अर्थ हैं -
पहला, सिन्धु नदी जो मानसरोवर के
पास से निकल कर लद्दाख़ और
पाकिस्तान से बहती हुई समुद्र मे
मिलती है, दूसरा - कोई समुद्र
या जलराशि। ऋग्वेद
की नदीस्तुति के अनुसार वे सात
नदियाँ थीं : सिन्धु , सरस्वती,
वितस्ता ( झेलम ), शुतुद्रि ( सतलुज),
विपाशा ( व्यास), परुषिणी ( रावी
) और अस्किनी ( चेनाब)। एक अन्य
विचार के अनुसार हिमालय के प्रथम
अक्षर "हि" एवं इन्दु का अन्तिम अक्षर
"न्दु", इन
दोनों अक्षरों को मिलाकर शब्द
बना "हिन्दु" और यह भूभाग
हिन्दुस्थान कहलाया। हिन्दू शब्द
उस समय धर्म की बजाय
राष्ट्रीयता के रुप में प्रयुक्त
होता था। चूँकि उस समय भारत में
केवल वैदिक धर्म को ही मानने वाले
लोग थे, बल्कि तब तक अन्य
किसी धर्म का उदय नहीं हुआ
था इसलिये "हिन्दू" शब्द
सभी भारतीयों के लिये प्रयुक्त
होता था। भारत में केवल वैदिक
धर्मावलम्बियों (हिन्दुओं) के बसने के
कारण कालान्तर में विदेशियों ने इस
शब्द को धर्म के सन्दर्भ में प्रयोग
करना शुरु कर दिया।
आम तौर पर हिन्दू शब्द को अनेक
विश्लेषकों द्वारा विदेशियों द्वार
ा दिया गया शब्द
माना जाता है। इस धारणा के
अनुसार हिन्दू एक फ़ारसी शब्द है।
हिन्दू धर्म को सनातन धर्म या
वैदिक धर्म भी कहा जाता है। ऋग्वेद
में सप्त सिन्धु का उल्लेख मिलता है -
वो भूमि जहाँ आर्य सबसे पहले बसे थे।
भाषाविदों के अनुसार हिन्द आर्य
भाषाओं की "स्" ध्वनि (संस्कृत
का व्यंजन "स्") ईरानी भाषाओं
की "ह्" ध्वनि में बदल जाती है।
इसलिये सप्त सिन्धु अवेस्तन
भाषा (पारसियों की धर्मभाषा)
मे जाकर हफ्त हिन्दु मे परिवर्तित
हो गया (अवेस्ता: वेन्दीदाद, फ़र्गर्द
1.18)। इसके बाद ईरानियों ने सिन्धु
नदी के पूर्व में रहने वालों को हिन्दु
नाम दिया। जब अरब से मुस्लिम
हमलावर भारत में आए, तो उन्होने
भारत के मूल धर्मावलम्बियों को
हिन्दू कहना शुरू कर दिया।
इन दोनों सिद्धान्तों में से पहले
वाले, प्राचीन काल में नामकरण को,
इस आधार पर
सही माना जा सकता है
कि "बृहस्पति आगम" सहित अन्य
आगम, ईरानी या अरबी सभ्यताओं से
बहुत प्राचीन काल में
लिखा जा चुका था। अतः उसमें
"हिन्दुस्थान" का उल्लेख होने से
स्पष्ट है कि हिन्दू (या हिन्दुस्थान)
नाम प्राचीन
ऋषियों द्वारा दिया गया था न
कि अरबों/ईरानियों द्वारा। यह
नाम बाद में अरबों/
ईरानियों द्वारा प्रयुक्त होने
लगा।
मंगलवार, 24 फ़रवरी 2015
निरुक्त
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