मुख्य सिद्धान्त
हिंदू मंदिर, श्री लंका
हिन्दू धर्म में कोई एक अकेले
सिद्धान्तों का समूह नहीं है जिसे
सभी हिन्दुओं को मानना ज़रूरी है।
ये तो धर्म से ज़्यादा एक जीवन
का मार्ग है। हिन्दुओं का कोई
केन्द्रीय चर्च या धर्मसंगठन नहीं है
और न ही कोई "पोप"। इसके अन्तर्गत
कई मत और सम्प्रदाय आते हैं और
सभी को बराबर
श्रद्धा दी जाती है। धर्मग्रन्थ
भी कई हैं। फ़िर भी, वो मुख्य
सिद्धान्त, जो ज़्यादातर हिन्दू
मानते हैं, इन सब में विश्वास: धर्म
(वैश्विक क़ानून), कर्म (और उसके फल),
पुनर्जन्म का सांसारिक चक्र, मोक्ष
(सांसारिक बन्धनों से मुक्ति--
जिसके कई रास्ते हो सकते हैं) और
बेशक, ईश्वर । हिन्दू धर्म स्वर्ग और नरक
को अस्थायी मानता है। हिन्दू धर्म
के अनुसार संसार के
सभी प्राणियों में आत्मा होती है।
मनुष्य ही ऐसा प्राणी है जो इस
लोक में पाप और पुण्य, दोनो कर्म
भोग सकता है और मोक्ष प्राप्त कर
सकता है। हिन्दू धर्म में चार मुख्य
सम्प्रदाय हैं : वैष्णव (जो विष्णु
को परमेश्वर मानते हैं), शैव (जो शिव
को परमेश्वर मानते हैं), शाक्त
(जो देवी को परमशक्ति मानते हैं)
और स्मार्त (जो परमेश्वर के विभिन्न
रूपों को एक ही समान मानते हैं)।
लेकिन ज्यादातर हिन्दू स्वयं
को किसी भी सम्प्रदाय में वर्गीकृत
नहीं करते हैं। प्राचीनकाल और
मध्यकाल में शैव, शाक्त और वैष्णव
आपस में लड़ते रहते थे. जिन्हें मध्यकाल
के संतों ने समन्वित करने की सफल
कोशिश की और
सभी संप्रदायों को परस्पर आश्रित
बताया।
संक्षेप में, हिन्दुत्व के प्रमुख तत्त्व
निम्नलिखित हैं-हिन्दू-धर्म हिन्दू-
कौन?-- गोषु भक्तिर्भवेद्यस्य प्रणवे
च दृढ़ा मतिः।
पुनर्जन्मनि विश्वासः स वै
हिन्दुरिति स्मृतः।। अर्थात--
गोमाता में जिसकी भक्ति हो,
प्रणव जिसका पूज्य मन्त्र हो,
पुनर्जन्म में जिसका विश्वास हो--
वही हिन्दू है। मेरुतन्त्र ३३ प्रकरण के
अनुसार ' हीनं दूषयति स हिन्दु '
अर्थात जो हीन
(हीनता या नीचता) को दूषित
समझता है (उसका त्याग करता है) वह
हिन्दु है। लोकमान्य तिलक के
अनुसार-
असिन्धोः सिन्धुपर्यन्ता यस्य
भारतभूमिका। पितृभूः पुण्यभूश्चैव स
वै हिन्दुरिति स्मृतः।। अर्थात्-
सिन्धु नदी के उद्गम-स्थान से लेकर
सिन्धु (हिन्द महासागर) तक सम्पूर्ण
भारत भूमि जिसकी पितृभू
(अथवा मातृ भूमि) तथा पुण्यभू
(पवित्र भूमि) है, (और उसका धर्म
हिन्दुत्व है) वह हिन्दु कहलाता है।
हिन्दु शब्द मूलतः फा़रसी है
इसका अर्थ उन भारतीयों से है
जो भारतवर्ष के प्राचीन ग्रन्थों,
वेदों, पुराणों में वर्णित भारतवर्ष
की सीमा के मूल एवं
पैदायसी प्राचीन निवासी हैं।
कालिका पुराण, मेदनी कोष
आदि के आधार पर वर्तमान हिन्दू
ला के मूलभूत आधारों के अनुसार
वेदप्रतिपादित रीति से वैदिक धर्म
में विश्वास रखने वाला हिन्दू है।
यद्यपि कुछ लोग कई संस्कृति के
मिश्रित रूप को ही भारतीय
संस्कृति मानते है,
जबकि ऐसा नही है। जिस
संस्कृति या धर्म की उत्पत्ती एवं
विकास भारत भूमि पर नहीं हुआ है,
वह धर्म या संस्कृति भारतीय
(हिन्दू) कैसे हो सकती है।
हिन्दू धर्म के सिद्धान्त के कुछ मुख्य
बिन्दु:
1. ईश्वर एक नाम अनेक.
2. ब्रह्म या परम तत्त्व सर्वव्यापी है.
3. ईश्वर से डरें नहीं, प्रेम करें और
प्रेरणा लें.
4. हिन्दुत्व का लक्ष्य स्वर्ग-नरक से
ऊपर.
5. हिन्दुओं में कोई एक पैगम्बर नहीं है.
6. धर्म की रक्षा के लिए ईश्वर बार-
बार पैदा होते हैं.
7. परोपकार पुण्य है, दूसरों को कष्ट
देना पाप है.
8. जीवमात्र
की सेवा ही परमात्मा की सेवा है.
9. स्त्री आदरणीय है.
10. सती का अर्थ पति के
प्रति सत्यनिष्ठा है.
11. हिन्दुत्व का वास हिन्दू के मन,
संस्कार और परम्पराओं में.
12. पर्यावरण की रक्षा को उच्च
प्राथमिकता.
13. हिन्दू दृष्टि समतावादी एवं
समन्वयवादी.
14. आत्मा अजर-अमर है.
15. सबसे बड़ा मंत्र गायत्री मंत्र.
16. हिन्दुओं के पर्व और त्योहार
खुशियों से जुड़े हैं.
17. हिन्दुत्व का लक्ष्य पुरुषार्थ है और
मध्य मार्ग को सर्वोत्तम
माना गया है.
18. हिन्दुत्व एकत्व का दर्शन है.
मंगलवार, 24 फ़रवरी 2015
सिद्धान्तं
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