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शुक्रवार, 27 फ़रवरी 2015

हनुमानजी के 10 रहस्य 3

नौवॉं रहस्य
क्या अपने कभी सुना है
कि हनुमानजी का विवाह भी हुआ था?
आज तक यह बात लोगों से छिपी रही,
क्योंकि लोग हिन्दू शास्त्र नहीं पढ़ते और
जो पंडित या आचार्य शास्त्र पढ़ते हैं वे
ऐसी बातों का जिक्र नहीं करते हैं लेकिन
आज हम आपको बता रहे हैं
हनुमानजी का एक ऐसा सच
जिसको जानकर आप रह जाएंगे हैरान...
आंध्रप्रदेश के खम्मम जिले में एक मंदिर
ऐसा विद्यमान है, जो प्रमाण है
हनुमानजी के विवाह का। इस मंदिर में
हनुमानजी की प्रतिमा के साथ
उनकी पत्नी की प्रतिमा भी
विराजमान है। इस मंदिर के दर्शन करने के
लिए दूर-दूर से लोग आते हैं।
माना जाता है कि हनुमानजी के
उनकी पत्नी के साथ दर्शन करने के बाद
पति-पत्नी के बीच चल रहे सारे विवाद
समाप्त हो जाते हैं। उनके दर्शन के बाद
जो भी विवाद की शुरुआत करता है,
उसका बुरा होता है।
हनुमानजी की पत्नी का नाम
सुवर्चला था। वैसे तो हनुमानजी बाल
ब्रह्मचारी हैं और आज भी वे ब्रह्मचर्य के
व्रत में ही हैं, विवाह करने का मतलब यह
नहीं कि वे ब्रह्मचारी नहीं रहे।
कहा जाता है कि पराशर संहिता में
हनुमानजी का किसी खास
परिस्थिति में विवाह होने का जिक्र
है। कुछ विशेष परिस्थितियों के कारण
ही बजरंगबली को सुवर्चला के साथ
विवाह बंधन में बंधना पड़ा। इस संबंध में एक
कथा है कि हनुमानजी ने भगवान सूर्य
को अपना गुरु बनाया था।
हनुमानजी भगवान सूर्य से
अपनी शिक्षा ग्रहण कर रहे थे। सूर्य
कहीं रुक नहीं सकते थे इसलिए
हनुमानजी को सारा दिन भगवान सूर्य
के रथ के साथ-साथ उड़ना पड़ता था और
भगवान सूर्य उन्हें तरह-तरह की विद्याओं
का ज्ञान देते। लेकिन
हनुमानजी को ज्ञान देते समय सूर्य के
सामने एक दिन धर्मसंकट खड़ा हो गया।
कुल 9 तरह की विद्याओं में से
हनुमानजी को उनके गुरु ने 5 तरह
की विद्याएं तो सिखा दीं, लेकिन
बची 4 तरह की विद्याएं और ज्ञान ऐसे
थे, जो केवल किसी विवाहित
को ही सिखाए जा सकते थे।
हनुमानजी पूरी शिक्षा लेने का प्रण कर
चुके थे और इससे कम पर वे मानने
को राजी नहीं थे। इधर भगवान सूर्य के
सामने संकट था कि वे धर्म के अनुशासन के
कारण किसी अविवाहित को कुछ विशेष
विद्याएं नहीं सिखा सकते थे।
ऐसी स्थिति में सूर्यदेव ने
हनुमानजी को विवाह की सलाह दी।
अपने प्रण को पूरा करने के लिए
हनुमानजी ने विवाह करने की सोची।
लेकिन हनुमानजी के लिए वधू कौन हो और
कहां से वह मिलेगी? इसे लेकर सभी सोच में
पड़ गए। ऐसे में सूर्यदेव ने अपनी परम
तपस्वी और
तेजस्वी पुत्री सुवर्चला को हनुमानजी के
साथ शादी के लिए तैयार कर लिया।
इसके बाद हनुमानजी ने
अपनी शिक्षा पूर्ण की और
सुवर्चला सदा के लिए अपनी तपस्या में रत
हो गई। इस तरह हनुमानजी भले
ही शादी के बंधन में बंध गए हो, लेकिन
शारीरिक रूप से वे आज भी एक
ब्रह्मचारी ही हैं।
दसवाँ रहस्य
एक वेबसाइट का दावा है कि प्रत्येक 41
साल बाद हनुमानजी श्रीलंका के
जंगलों में प्राचीनकाल से रह रहे
आदिवासियों से मिलने के लिए आते हैं।
वेबसाइट के मुताबिक श्रीलंका के जंगलों में
कुछ ऐसे कबीलाई लोगों का पता चला है
जिनसे मिलने हनुमानजी आते हैं। इन
कबीलाई लोगों पर अध्ययन करने वाले
आध्यात्मिक संगठन 'सेतु' के अनुसार पिछले
साल ही हनुमानजी इन कबीलाई
लोगों से मिलने आए थे। अब हनुमानजी 41
साल बाद आएंगे। इन कबीलाई
या आदिवासी समूह के
लोगों को 'मातंग' नाम दिया गया है।
उल्लेखनीय है कि कर्नाटक में पंपा सरोवर
के पास मातंग ऋषि का आश्रम है,
जहां हनुमानजी का जन्म हुआ था।
वेबसाइट सेतु एशिया ने दावा किया है
कि 27 मई 2014
को हनुमानजी श्रीलंका में मातंग के साथ
थे। सेतु के अनुसार कबीले का इतिहास
रामायणकाल से जुड़ा है। कहा जाता है
कि भगवान राम के स्वर्ग चले जाने के बाद
हनुमानजी दक्षिण भारत के जंगलों में लौट
आए थे और फिर समुद्र पार कर श्रीलंका के
जंगलों में रहने लगे। जब तक पवनपुत्र हनुमान
श्रीलंका के जंगलों में रहे, वहां के कबीलाई
लोगों ने उनकी बहुत सेवा की। जब
हनुमानजी वहां से जाने लगे तब उन्होंने
वादा किया कि वे हर 41 साल बाद
आकर वहां के कबीले
की पीढ़ियों को ब्रह्मज्ञान देंगे। कबीले
का मुखिया हनुमानजी के साथ
की बातचीत को एक लॉग बुक में दर्ज
कराता है। 'सेतु' नामक संगठन इस लॉग बुक
का अध्ययन कर उसका खुलासा करने
का दावा करता है।

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