हिन्दू संस्कृति
वैदिक काल और यज्ञ
प्राचीन काल में आर्य लोग वैदिक
मंत्रों और अग्नि-यज्ञ से कई देवताओं
की पूजा करते थे। आर्य देवताओं
की कोई मूर्ति या मन्दिर
नहीं बनाते थे। प्रमुख आर्य देवता थे :
देवराज इन्द्र , अग्नि, सोम और वरुण।
उनके लिये वैदिक मन्त्र पढ़े जाते थे और
अग्नि में घी, दूध, दही, जौ,
इत्यागि की आहुति दी जाती थी।
प्रजापति ब्रह्मा , विष्णु और शिव
का उस समय कम ही उल्लेख
मिलता है।
तीर्थ एवं तीर्थ यात्रा
भारत एक विशाल देश है, लेकिन
उसकी विशालता और
महानता को हम तब तक नहीं जान
सकते, जब तक कि उसे देखें नहीं। इस ओर
वैसे अनेक महापुरूषों का ध्यान गया,
लेकिन आज से बारह सौ वर्ष पहले
आदिगुरू शंकराचार्य ने इसके लिए एक
बहुत ही महत्वपूर्ण कार्य किया।
उन्होनें चारों दिशाओं में भारत के
छोरों पर, चार पीठ (मठ) स्थापित
उत्तर में बदरीनाथ के निकट
ज्योतिपीठ, दक्षिण में रामेश्वरम् के
निकट श्रृंगेरी पीठ, पूर्व में
जगन्नाथपुरी में गोवर्धन पीठ और
पश्चिम में द्वारिकापीठ।
तीर्थों के प्रति हमारे
देशवासियों में
बड़ी भक्ति भावना है। इसलिए
शंकराचार्य ने इन
पीठो की स्थापना करके
देशवासियों को पूरे भारत के दर्शन
करने का सहज अवसर दे दिया। ये
चारों तीर्थ चार धाम कहलाते है।
लोगों की मान्यता है कि जो इन
चारों धाम की यात्रा कर लेता है,
उसका जीवन धन्य हो जाता है।
मूर्तिपूजा
ज्यादातर हिन्दू भगवान
की मूर्तियों द्वारा पूजा करते हैं।
उनके लिये मूर्ति एक आसान
सा साधन है, जिसमें कि एक
ही निराकार ईश्वर
को किसी भी मनचाहे सुन्दर रूप में
देखा जा सकता है। हिन्दू लोग
वास्तव में पत्थर और लोहे
की पूजा नहीं करते, जैसा कि कुछ
लोग समझते हैं। मूर्तियाँ हिन्दुओं के
लिये ईश्वर की भक्ति करने के लिये
एक साधन मात्र हैं।
इतिहासकारो का मानना है
कि हिन्दु धर्म मे मूर्ति पूजा गौतम
बुद्ध् के समय प्रारम्भ् हई।
मंदिर
हिन्दुओं के
उपासना स्थलों को मन्दिर कहते हैं।
प्राचीन वैदिक काल में मन्दिर
नहीं होते थे। तब उपासना अग्नि के
स्थान पर होती थी जिसमें एक सोने
की मूर्ति ईश्वर के प्रतीक के रूप में
स्थापित की जाती थी। एक
नज़रिये के मुताबिक बौद्ध और जैन
धर्मों द्वारा बुद्ध और महावीर
की मूर्तियों और
मन्दिरों द्वारा पूजा करने की वजह
से हिन्दू भी उनसे प्रभावित होकर
मन्दिर बनाने लगे। हर मन्दिर में एक
या अधिक देवताओं
की उपासना होती है। गर्भगृह में
इष्टदेव की मूर्ति प्रतिष्ठित
होती है। मन्दिर प्राचीन और
मध्ययुगीन भारतीय कला के श्रेष्ठतम
प्रतीक हैं। कई मन्दिरों में हर साल
लाखों तीर्थयात्री आते हैं।
अधिकाँश हिन्दू चार
शंकराचार्यों को (जो ज्योतिर्मठ,
द्वारिका, शृंगेरी और पुरी के मठों के
मठाधीश होते हैं) हिन्दू धर्म के
सर्वोच्च धर्मगुरु मानते हैं।
मंगलवार, 24 फ़रवरी 2015
हिन्दू संस्कृति
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