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मंगलवार, 24 फ़रवरी 2015

आत्मा

आत्मा
हिन्दू धर्म के अनुसार हर चेतन
प्राणी में एक अभौतिक आत्मा
होती है, जो सनातन, अव्यक्त,
अप्रमेय और विकार रहित है। हिन्दू
धर्म के मुताबिक मनुष्य में ही नहीं,
बल्कि हर पशु और पेड़-पौधे,
यानि कि हर जीव में
आत्मा होती है। भगवद्गीता में
भगवान श्रीकृष्ण द्वारा आत्मा के
लक्षण इस प्रकार बताए गए हैं:
न जायते म्रियते वा कदाचिन्नाय
भूत्वा भविता वा न भूय:।
अजो नित्य: शाश्वतोअयं पुराणो, न
हन्यते ह्न्यमान शरीरे।। २-२०।।
(यह आत्मा किसी काल में भी न
तो जन्मता है और न तो मरता ही है
तथा न ही यह उत्पन्न होकर फिर
होनेवाला ही है; क्योंकि यह
अजन्मा, नित्य सनातन, पुरातन है;
शरीर के मारे जाने पर भी यह
नहीं मारा जाता।)
किसी भी जन्म में अपनी आज़ादी से
किये गये कर्मों के मुताबिक
आत्मा अगला शरीर धारण करती है।
जन्म-मरण के चक्र में आत्मा स्वयं
निर्लिप्त रह्ते हुए अगला शरीर
धारण करती है। अच्छे कर्मफल के
प्रभाव से मनुष्य कुलीन घर
अथवा योनि में जन्म ले सकता है
जबकि बुरे कर्म करने पर निकृष्ट
योनि में जन्म लेना पड्ता है। जन्म
मरण का सांसारिक चक्र तभी ख़त्म
होता है जब व्यक्ति को मोक्ष
मिलता है। उसके बाद आत्मा अपने
वास्तविक सत्-चित्-आनन्द स्वभाव
को सदा के लिये पा लेती है। मानव
योनि ही अकेला ऐसा जन्म है जिसमें
मनुष्य के कर्म, पाप और पुण्यमय फल देते
हैं और सुकर्म के द्वारा मोक्ष
की प्राप्ति मुम्किन है। आत्मा और
पुनर्जन्म के प्रति यही धारणाएँ
बौद्ध धर्म और सिख धर्म
का भी आधार है। `
धर्मग्रन्थ
मुख्य लेख : हिंदू धर्म के ग्रंथ
हिंदू धर्म के पवित्र
ग्रन्थों को दो भागों में
बाँटा गया है- श्रुति और स्मृति ।
श्रुति हिन्दू धर्म के सर्वोच्च ग्रन्थ हैं,
जो पूर्णत: अपरिवर्तनीय हैं, अर्थात्
किसी भी युग में इनमे कोई बदलाव
नही किया जा सकता।
स्मृति ग्रन्थों मे देश-कालानुसार
बदलाव हो सकता है। श्रुति के
अन्तर्गत वेद : ऋग्वेद, सामवेद, यजुर्वेद
और अथर्ववेद ब्रह्म सूत्र व उपनिषद् आते
हैं। वेद श्रुति इसलिये कहे जाते हैं
क्योंकि हिन्दुओं का मानना है
कि इन वेदों को परमात्मा ने
ऋषियों को सुनाया था, जब वे गहरे
ध्यान में थे। वेदों को श्रवण
परम्परा के अनुसार गुरू
द्वारा शिष्यों को दिया जाता थ
ा। हर वेद में चार भाग हैं- संहिता --
मन्त्र भाग, ब्राह्मण-ग्रन्थ -- गद्य
भाग, जिसमें कर्मकाण्ड समझाये गये
हैं, आरण्यक -- इनमें अन्य गूढ बातें
समझायी गयी हैं, उपनिषद् -- इनमें
ब्रह्म, आत्मा और इनके सम्बन्ध के बारे
में विवेचना की गयी है। अगर
श्रुति और स्मृति में कोई विवाद
होता है तो श्रुति ही मान्य
होगी। श्रुति को छोड़कर अन्य
सभी हिन्दू धर्मग्रन्थ स्मृति कहे जाते
हैं, क्योंकि इनमें वो कहानियाँ हैं
जिनको लोगों ने पीढ़ी दर
पीढ़ी याद किया और बाद में
लिखा। सभी स्मृति ग्रन्थ
वेदों की प्रशंसा करते हैं।
इनको वेदों से निचला स्तर प्राप्त है,
पर ये ज़्यादा आसान हैं और
अधिकांश हिन्दुओं द्वारा पढ़े जाते
हैं (बहुत ही कम हिन्दू वेद पढ़े होते हैं)।
प्रमुख स्मृतिग्रन्थ हैं:- इतिहास--
रामायण और महाभारत , भगवद
गीता , पुराण-- (18), मनुस्मृति ,
धर्मशास्त्र और धर्मसूत्र , आगम
शास्त्र । भारतीय दर्शन के ६ प्रमुख
अंग हैं- साँख्य , योग , न्याय , वैशेषिक ,
मीमांसा और वेदान्त।
देव और दानवों के माता-
पिता का नाम
हिंदू धर्मग्रंथों के मुताबिक
देवता धर्म के तो दानव अधर्म के
प्रतीक हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं
कि पौराणिक मान्यताओं में देव-
दानवों को एक ही पिता, किंतु
अलग-अलग माताओं की संतान
बताया गया है। इसके मुताबिक देव-
दानवों के पिता ऋषि कश्यप हैं।
वहीं, देवताओं की माता का नाम
अदिति और
दानवों की माता का नाम
दिति है।

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